1. किस उम्र के बच्चों को MR लगना है :
यह टीका इस कार्यक्रम के तहत 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों अथवा स्कूलों में नर्सरी से दसवीं तक के बच्चों को लगना है। जिनमें सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल दोनों आएंगे।
2. किन बीमारियों से सुरक्षा मिलेगी :
इस टीके एम आर में एम का अर्थ है मीसल्स एवं आर का अर्थ है रूबेला। अतः मीसल्स एवं रुबेला नाम के संक्रामक वायरस से सुरक्षा मिलेगी।
3. दोबारा से लगाना से टीके के साइड इफेक्ट तो नहीं हैं?
प्राइवेट क्लिनिक से बहुत से अभिभावक एम एम आर का टीका लगवा चुके होते हैं जो कि, 9 माह एवं 15 माह की उम्र पर लगता है। किंतु इस टीके के लगे होने के बावज़ूद एम आर का यह सरकारी टीका लगवाना पूर्णतः सुरक्षित है। एवं देश से खसरा एवं रुबेला के वायरस को ख़त्म करने की ओर महत्वपूर्ण क़दम है। प्राइवेट में उपलब्ध एम एम आर के टीके में मीसल्स एवं रुबेला के अत्तिरिक्त मम्प्स वायरस का भी टीका होता है।
4.हमें स्कूल या घरों में आई टीम से टीके लगवाना चाहिए या प्राइवेटेली कहीं जाकर?
स्कूल में या घर में आई सरकारी टीम से यह टीका लगवाया जा सकता है। प्राइवेट में यदि आप टीके लगवाते रहे हैं तो अन्य टीकों के शेड्यूल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
5.क्या जो टीम टीका लगाने आएगी, वह इस बात का पूरा ध्यान रखेगी कि टीका सही है ?
यह कार्यक्रम विश्व स्वास्थ्य संगठन, राज्य सरकार, केंद्र सरकार की सीधी निगरानी में है एवं भारत के लिए बेहद गर्व की बात है। क्योंकि यह अपने तरह का विश्व का सर्वाधिक बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है। अतः इसमें उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा का पूर्णतः ख़याल रखा गया है। साथ ही लोकल शिशु रोग विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा ।
6.मेरा बेटा/ बेटी स्कूल में पढ़ रहा है। टीका लगने के बाद क्या फीवर तो नहीं आएगा?
आम तौर पर इस टीके से कोई तकलीफ, दर्द या बुख़ार इत्यादि नहीं होता। रेयर केस में होगा भी तो 24 घंटे से अधिक नहीं होगा। जो कि पेरासिटामोल से नियंत्रित भी रह सकता है।
7.इस टीके के लगने के बाद क्या मेरा बेटा या बेटी MR से पूरी तरह से हमेशा-हमेशा के लिए बच सकेगा?
दुनिया के 37 प्रतिशत खसरा के केस भारत में होते हैं। इस टीके के बाद खसरा एवं रुबेला होने की संभावना में 90 प्रतिशत तक कमी आएगी । इसका असर आजीवन रहेगा
8. क्या इस टीके के बाद फिर से टीका लगवाना पड़ेगा? कितने साल बाद लगवाना पड़ेगा?
नहीं, इस टीके के बाद यह टीका फिऱ से नहीं लगवाना होगा। किन्तु सामान्य टीकाकरण कार्यक्रम में जो टीके बच्चों को लगते हैं वे सभी लगवाना होगा। अतः 9 माह एवं 15 माह की उम्र पर यह टीका राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में लगेगा।
9.क्या होगा यदि मैं अपने बच्चे को यह टीका न लगवाऊँ ?
खसरा ,तेज़ी से एक दूसरे को संक्रमित करने वाला एक वायरस है जिससे लगभग 25 लाख बच्चे प्रतिवर्ष भारत में संक्रमित होते रहे हैं, जिनमें से तक़रीबन 49000 की मृत्यु प्रतिवर्ष हो जाती है।

अन्य बातें

खसरे का टीका 9 माह की उम्र पर राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल है , जिससे काफी सुधार हुआ भी था स्थिति में , किन्तु फिर भी खसरे से होने वाली विश्व की कुल मृत्यु का 37 प्रतिशत भारत में होता रहा है। ऐसे में आवश्यकता थी इस जानलेवा किन्तु आसानी से रोकथाम किये जाने वाले वायरस का प्रभाव एवं फैलाव बड़े स्तर पर रोकने की ।
अतः 2 वर्ष में सम्पूर्ण भारत में 44 करोड़ बच्चों को यह टीका दिया जाना है। जिससे इन दोनों खतरनाक वायरस के संक्रमण एवं प्रभाव को रोक दिया जाए।
ऐसे में हम सबकी ज़िम्मेदारी है, अच्छे नागरिक एवं देशभक्त के भी रूप में एक अच्छे अभिभावक के अत्तिरिक्त भी। यदि बहुत सारे अभिभावक इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे तब वायरस को अवसर मिलता रहेगा। भारत ने इसके पहले स्मॉल पॉक्स, पोलियो के निर्मूलन एवं नवजात शिशु के टिटनेस पर नियंत्रण हासिल करने में अभूतपुर्व सफ़लता प्राप्त की है।


खसरा के लक्षण

जानकारी ही बचाव है

सर्दी खांसी के साथ बुख़ार, एवं तीसरे से चौथे दिन पर लाल दाने चेहरे पर आते हैं।
बुख़ार एक हफ्ते जे भीतर ठीक हो जाता है। किंतु रोगप्रतिरोधक क्षमता, कमजोरी कुछ माह तक बनी रह सकती है। जिससे अन्य कीटाणु हमला कर बीमार कर सकते हैं।

रुबेला वायरस संक्रमण गर्भावस्था के दौरान मां को हो जाये तो शिशु में गंभीर जन्मजात व्याधियां ज़ैसे मोतियाबिंद, दिल की धमनी का खुला रह जाना, बहरापन, मेन्टल रिटार्डेशन इत्यादि हो सकता है। अतः आज यदि एक बच्ची इस टीके से सुरक्षा पाती है तो यह अगली पीढी तक के लिए सुरक्षा होगी।

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