Teeka!

Child All Round Development

प्रियअभिभावक , आज के इस ज़माने में बच्चों का विकास एक बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी है ।

अभी हमने अपने ब्लॉग में विकास को चार मुख्य प्रकार से बताया गया है :

स्वास्थय सम्बन्धी

बहुत सामान्य लक्षण हमेशा अनदेखा करने जितने सामान्य नहीं होते और गंभीर लक्षण हमेशा चिंताजनक नहीं होते हैं।जरूरत है हमें सही जानकारी की।

खान पान सम्बन्धी

बच्चों के लिए सबसे अच्छा खाना क्या होना चाहिए? किस उम्र में भोजन किस प्रकार का होना चाहिए

संस्कार सम्बन्धी

संस्कार जीवन का आधार होते हैं , हम अपने बच्चो के जीवन की नीव संस्कारों से दृढ़ कैसे करें

प्रतिरोधक क्षमता सम्बन्धी

टीकाकरण के बारे में सारी जानकारी जैसे कि -यह किस बीमारी से प्रतिरक्षा करता है, मूल्य , दुष्प्रभाव और आदि ।

इस ब्लॉग में हम संस्कारो की बात करेंगे , इनका मतलब समझेंगे , इनके प्रकार और इन्हे कैसे हम अपने बच्चों को दे सकते हैं । आपको जानकर आश्चर्य होगा की ये छोटी छोटी बातों के माध्यम से हम कैसे बच्चों के जीवन को बेहतर और बहुमूल्य बना सकते हैं ।

संस्कार क्या हैं :

हम यदि शब्दिक अर्थ की बात करें तो संस्कार को हम इस प्रकार विभाजित कर सकते हैं :

सं से सम अर्थात सामान

और

कार से कृ अर्थात धातु = धातु के समान चमकाने वाला ।

सं से सम अर्थात सामान
कार से कृ अर्थात धातु
धातु के समान चमकाने वाला ।

संस्कार :

यहाँ पर चमक का अर्थ आतंरिक ह्रदय में आने वाले अच्छे विचारो से है ।

कुछ और लक्षण इस प्रकार हैं : –

  • दोषों को दूर करके गुणों को ग्रहण करना ही संस्कार है ।
  • संस्कार हमारे विचारो को ऊंचाई पर ले जाते हैं,
  • संतान को संस्कारित बनाने और  कौटुंबिक जीवन को सुरक्षित करने की एक मनोवैज्ञानिक एवं धर्म अनुमोदित क्रिया पद्धति को संस्कार कहा जाता है ।
  • वे सारे सद्गुण , जो इन्सान को आम पुरुषो की भीड़ से निकल कर महापुरुषों का दर्जा दिलाते है , संस्कार कहलाते है ।
  • आत्मा , शरीर एवं वस्तुओं की शुध्धि हेतु समय समय पर जो विशेष कार्य किये जाते है वे संस्कार कहलाते है ।
  • जिस शिक्षा से मनुष्य का हित करने ,एकता तथा सामंजस्य बनाने ,दीन दरिद्री असहाय अनाथ को यथायोग्य सब प्रकार का सहयोग करने के विचार उत्पन्न होते हैं और आत्मिक गुणों का विकास एवं वृद्धि होती है उस शिक्षा को संस्कार कहते हैं
  • अपने देश, कुल एवं ऐतिहासिक पुरुषों की संस्कृति-उत्तम परंपराओं को जीवित बनाए रखने की भावना ही संस्कार है ।

लौकिक क्षेत्र में मुख्यतः गर्भ के संस्कार, जन्म के संस्कार,सूरजपूजना,नामकरण संस्कार एवं विवाह के संस्कार आदि अनेक प्रकार के संस्कार माने गए हैं।

यहां पर हम जीवन को संस्कारित करने वाले संस्कारों के बारे में चर्चा करेंगे यह संस्कार हमें कहां कहां से मिलते हैं उसके बारे में जानेगे । 

जीवों में पाए जाने वाले संस्कार :

  • असंस्कार
  • कुसंस्कार
  • सुसंस्कार
  • पूर्व उपार्जित संस्कार
  • कुल-परंपरागत संस्कार
  • माता पिता द्वारा प्रदत्त संस्कार
  • संगति से प्राप्त संस्कार
  • गुरु दत्त संस्कार
sanskar ke prakar
असंस्कार
इसमें न कुसंस्कार होते हैं और न सुसंस्कार अर्थात्‌ जिसमें संस्कार नाम की कोई चीज ही नहीं होती है, वे असंस्कार कहलाते हैं ।
कुसंस्कार
जिन कार्यों से जीवन पतित हो जाता है, उन कार्यों को करने की भावना कुसंस्कार कहलाती है।
सुसंस्कार
1. श्रेष्ठ संस्कारों को सुसंस्कार कहते हैं।
2. जिन कार्यों को करने से स्वयं का एवं दूसरे का हित हो, ऐसे कार्यों को करने की भावना रखना सुसंस्कार है।
3. परोपकार, दया, करुणा, देशहित, पापनिवृत्ति एवं अच्छे कार्यो में प्रवृत्ति होना ही सुसंस्कार है।
पूर्व उपार्जित संस्कार
पूर्व भवों में किये गये कर्मों के फल में प्राप्त "आदतें ' पूर्वोपार्जित संस्कार कहलाते हैं।
पूर्व भवों में किये गये बैर और प्रेम के कारण वर्तमान में उत्पन्न बैर एवं प्रेम के संस्कार अर्थात्‌ सहज रूप से जो बैर तथा प्रेम उत्पन्न होता है, वह पूर्वोपार्जित संस्कार है।
कुल-परंपरागत संस्कार
1. माता-पिता आदि के कुल से आये हुए संस्कार कुल-परम्परागत संस्कार कहलाते हैं ।
2. दादा-परदादा आदि के क्रम से चली आई अच्छी या बुरी आदत को कुल परम्परागत संस्कार कहते हैं।
3. आनुवंशिकता को ही कुल परम्परागत संस्कार कहते हैं।
माता पिता द्वारा प्रदत्त संस्कार
माता पिता द्वारा दिए गए सीख और आदतों को माता-पिता द्वारा प्रदत्त संस्कार कहते हैं ।
ये सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है , बच्चे अपने माता पिता की बातों से नहीं बल्कि अपने माता पिता को देख कर ही सीखते हैं
गुरु दत्त संस्कार
गुरु दत्त संस्कार
संगति से प्राप्त संस्कार
जिस प्रकार पानी को जैसा रंग मिलता है वह उसी रंग में परिवर्तित हो जाता है उसी प्रकार बच्चा भी पानी के समान है । वह जैसी संगति प्राप्त करता है उसी रूप में ढल जाता है ।
हमने अभी संस्कार और उसके प्रकार के बारे में जाना , अब हर संकसर के प्रकार के बारे में विस्तृत लेख के लिए हमारे ब्लॉग को पढ़ते रहे
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